Saturday, October 7, 2017

Cyber का गलत use

cyber attack


देश के बच्चे जिस तेजी से internet से जुड़ रहे है, उसी तेजी से वहां चलने वाली गुंडागर्दी का शिकार भी हो रहे है। cyber की दुनिया में चंद सेकंड्स ही उन्हें मजाक का पात्र बनाने या बदनाम कर देने के लिए काफी है। ऐसे में cyber bullying(cyber दादागिरी) ऐसी नई term है, जो माता-पिता और अध्यापको के लिए चुनौती बन रही है।

दिल्ली के एक school की एक student अनामिका सिंह अब भी यह समझ नही पा रही है कि वह उन उन friends से कैसे निबटे, जिन्होंने मामूली सी बात पर उसे अपने group से बाहर कर दिया। पिछले साल अनामिका की school group की एक लडकी से कहा-सुनी हो गयी थी, उसका बदला लेने ले लिए ही उसकी class के एक group ने अनामिका को whats app group से delete और Facebook से unfriend कर दिया। 17 वर्ष की अनामिका gossip session की अब का हिस्सा नही है।

चूँकि अब बच्चे अपना ज्यादातर समय online होकर गुजारने लगे है, इसलिए पिछले कुछ सालो में cyber bullying यानी cyber दादागिरी के आधिक मामले सामने आ रहे है। यह एक ऐसी term बन चुकी है, जो teacher और parents को परेशान कर रही है।

फोर्टिस हेल्थकेयर में मानसिक स्वास्थ्य एवं व्यवहार विज्ञान के निदेशक और मनोचिकित्सक doctor समीर पारीख कहते है,’ बदलते समय के अनुरूप ही bullying की definition को भी विस्तार दिया जाना चाहिए। इसे केवल गुस्से से जुड़ा व्यवहार ही नही कहा जा सकता। social media पर अलगाव को bullying की श्रेणी में रखना होगा।

online counseling center ‘mindframes’ की संस्थापक doctor बत्रा कहती है,’ ऐसी bullying का शिकार वे बच्चे होते है, जिन तक पंहुच बनाना आसान होता है। इन्हे व्यंग्यात्मक सन्देश, आलोचना करते ई-मेल्स, अपमान करती post, निजी तस्वीरों के माध्यम से bulling का शिकार बनाया जाता है

Online Bulling का असर

मुम्बई आधारित counseling center mind temple की मनोचिकित्सक doctor अंजली छाबडिया कहती है,’ cyber bullying का शिकार हुए बच्चे घबराहट, तनाव,डर, अकेलापन, आत्मसम्मान में कमी की गिरफ्त में आ जाते है।‘ doctor अंजली कहती है कि bullying से पीड़ित बच्चें school जाने की इच्छा नही दिखाता। इसकी वजह से उसके grade ख़राब हो जाते है और वह नशे की ओर जा सकता है, drugs ले सकता है या फिर खुद को नुकसान भी पहुंचा सकता है।

दूसरी ओर, अभिभावकों को ऐसी स्थिति में समझ नही आता कि क्या करे? अनामिका की माँ कहती है,’ बतौर अभिभावक हम खुद को असहाय पाते है, क्योकि हमे यह ठीक नही लगता कि बच्चे की लड़ाई में दखल दे।

कुछ मामलो में सलाहकार parents को school जाने की सलाह देते है। एक मामले में अभिभावकों ने मामले को इसी तरह निपटाया। उनके बच्चो को उसकी class का एक student Facebook पर अजीबोगरीब comment देकर परेशान कर रहा था। comment कुछ ऐसे थे,’ ये तो लडकी दिखता हैलडके कभी इतने गोरे नही होते है’,’ ये इतना मोटा क्यों है?’

इस मामले में पीड़ित बच्चे का इलाज करने वाली मनोचिकित्सक doctor सीमा हिंगोरानी ने बताया,’ यह बच्चा हर दिन अपने रंग, वजन को लेकर इस तरह के comment पढ़ता था। बुलीज को इस बात का अंदाजा भी नही था कि उसकी इन हरकतों का उस बच्चे के मनोविज्ञान पर कितना गहरा असर पड़ रहा है।

यह सब दो माह तक चलता रहा। जब बच्चे के parents ने उसके grade कम होते देखे, school जाने में वह परेशान करने लगा, उसका आत्मविश्वास गिरने लगा तो उन्हें महसूस हुआ कि उन्हें महसूस हुआ कि कुछ गडबड है। इसके बाद उन्होंने बच्चे को ले जाकर doctor की सलाह ली और करीब चार माह तक उसकी counseling चली। अब भी उसे दो माह की और थेरेपी लेने की सलाह दी गई है। जब इस बच्चे के अभिभावक मुद्दे को school के समक्ष ले गये तो bullying करने वाले बच्चे की भी counseling की गई।

रोकथाम के उपाय

स्पेसिलिस्ट कहते है कि cyber bullying से बचने का सबसे असरदार तरीका है सतर्क रहना। example के लिए दिल्ली public school, गुडगाँव ने एक anti bullying स्क्वाड और कमेटी बनाई है, जो student, counselor, principal और अभिभावकों को मिलाकर बनाई गई है। school की छात्र सलाहकार रेणुका फर्नांडिस कहती है,’ हम अपने school में bullying को संजीदगी से लेते है और इसे कम करने के लिए सख्त से सख्त नियम बनाते है।

मुंबई हीरानंदानी foundation school की principal कल्याणी पटनायक कहती है,’ आज के समय में बच्चो के internet के प्रति जूनून पर रोकथाम लगाना अध्यापको के लिए कठिन हो गया है।उनका school नियमित तौर पर counselling session चलाता है। इसमे बच्चो को internet के नुकसानों से आगाह किया जाता है। specialist मानते है कि इस problem से निबटने में अभिभावकों का हस्तक्षेप और दिशानिर्देश अहम रोल अदा कर सकते है। parents को बच्चो को online सूचनाओ के आदान-प्रदान के खतरों से आगाह करना चाहिए, उन्हें online account की निजता की अहमियत बतानी चाहिए, और cyber bullying के प्रति जागरूक करना चाहिए। doctor छाबडिया कहती है,’ इस प्रकिया को रोकने के लिए पीड़ित और बुली, दोनों को counseling दिए जाने की आवश्यकता है। तभी यह क्रम बंद हो सकता है।‘ doctor छाबडिया का यह भी मानना है कि cyber बुलीज हमेशा ही प्रतिक्रिया का इंतजार करते है, इसलिए ऐसी post पर ध्यान ना देना ही उचित रहता है। हालाकि कई मामलो में नजरंदाज करना काफी मुश्किल रहता है। ऐसे समय में अगर कोई बच्चा लिखी गई post से काफी आहत है तो उसे माता-पिता, अध्यापक, सलाहकार, थेरेपिस्ट या internet सेवा प्रदाता से यह बात share करना चाहिए। अगर जान से मारे जाने का खतरा है, शारीरिक हिंसा या अन्य कोई हिंसात्मक गतिविधि हुई है या या हो सकती है तो ऐसे में पुलिस को सुचना देना आवश्यक है।





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