Friday, June 29, 2018

Nation Pension System (NPS) के फायदें

national pension system
NPS: कम उम्र में निवेश फायदेमंद

National Pension System (NPS) ने पिछले पांच साल से अधिक return दिया है। इसमे निवेश पर दो लाख रूपये तक tax छूट भी मिलती है। इसमे छोटी पूंजी से भी निवेश की शुरुआत कर सकते है। महज दो हजार रूपये प्रतिमाह 25 की उम्र में निवेश शुरू करने पर आप सेवानिवृति तक करोड़पति बन सकते है। साथ ही 50 हजार रूपये से अधिक हर माह pension भी हासिल कर सकते है। इसमें जितनी कम उम्र में निवेश शुरू करेंगे बाद में उसका फायदा कई गुना बढ़ जाता है।

क्या है NPS

इसमें सेवानिवृति के लिए निवेश किया जाता है। 18 से 60 साल के बीच का कोई भी व्यक्ति इसकी सुविधा का फायदा उठा सकता है। 60 की उम्र होने पर 60% राशि एकमुश्त निकाल सकते है और न्यूनतम 40% ऐन्यूटी स्क्रीम में निवेश होती है जिसके आधार पर आपको pension मिलता है। एन्यूटी राशि में आप 100% भी निवेश कर सकते है। NPS का fund share बाज़ार, corporate bond तथा सरकारी प्रतिभूतियों में लगता है। इसके लिए भी आप विकल्प दे सकते है। लेकिन share में 50% से ज्यादा राशि का विकल्प नही दे सकते है। हालाकिं NPS अपने fund का 15% से अधिक share market में नही लगा सकता है।

कितना मिलेगा Return

NPS ने पिछले पांच साल में 12.79% का औसत return दिया है। जबकि कुछ चुनिंदा company के NPS में इस अवधि में 13.69% तक का return दिया है। एक साल में NPS ने 11% से अधिक का औसत return दिया है। जबकि कुछ चुनिंदा स्क्रीम में 19.93% तक return मिला है।

2,000 का निवेश करोड़पति बनाएगा

NPS में 25 साल की उम्र से दो हजार रूपये प्रतिमाह निवेश करते है तो 12% सालाना अनुमानित return पर 60 साल की उम्र में करीब 1.30 करोड़ रूपये की पूंजी जमा हो जाएगी। आप 35 साल में महज 8.40 लाख रूपये जमा करते है। लेकिन चक्रवृद्धि ब्याज की वजह से आपको एक करोड़ 21 लाख 60 हजार रूपये अधिक मिलते है। इसके बाद 1.30 करोड़ रूपये का न्यूनतम 40% एन्यूटी में निवेश करते है तो हर माह करीब 19 हजार रूपये pension मिलेगी। जबकि 60% एकमुश्त भुगतान के तहत आपको करीब 42 लाख रूपये मिलेंगें।

इसी तरह 60% एन्यूटी में लगाते है तो हर माह करीब 28 हजार रूपये pension मिलेगी और 40% एकमुश्त भुगतान के रूप में करीब 28 लाख रूपये मिलेंगे। यदि 80% राशि एन्यूटी में लगाते में लगाते है तो करीब 38 हजार रूपये हर माह pension मिलेगी और 20% एकमुश्त भुगतान के रूप में करीब 14 लाख रूपये मिलेंगे। इसी तरह यदि 35 की उम्र में निवेश शुरू करने पर अंतिम पूंजी महज एक तिहाई से भी कम 38 लाख रूपये के करीब रह जाती है। इस तरह पांच साल देर से निवेश की शुरुआत करने पर आप जहा 50 लाख रूपये कम पूंजी जमा कर पाते है, वही 10 साल देर करने पर करीब 92 लाख रुपये का नुकसान होता है।

Tax का लाभ

आयकर की धारा 80c के तहत NPS में निवेश पर 1.50 लाख रूपये सालाना tax छूट हासिल कर सकते है। जबकि धारा 80सीसीडी के तहत 50 हजार रुपये का अतिरिक्त tax छूट मिलती है। हालाँकि, इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि 60 वर्ष पूरा होने पर जो 60% राशि निकाली जाती है, उसके 40% पर tax लगता है।

आंशिक निकासी की सुविधा

जिन लोगो ने लगातार 10 साल तक NPS में निवेश किया है वह शिक्षा, शादी-ब्याह, घर के निर्माण और इलाज के लिए 25% राशि निकाल सकते है। दूसरी निकासी पांच साल बाद करने की अनुमति है।

निवेशकों की संख्या 18 गुनी बढ़ी

pension fund नियामक PFRDA के ताजा आंकड़ो के मुताबिक, NPS के निवेशकों की संख्या मार्च 2010 के 7.76 लाख से बढ़कर दिसम्बर 2016 तक एक करोड़ 42 लाख हो गई। इस तरह महज साढ़े सात साल में इसमें 18 गुना का इजाफा हुआ है। इस अवधि में NPS के आकार में भी 34 गुना बढ़ोत्तरी हुई।

Return

1-  1 हजार रूपये सालाना न्यूनतम निवेश की सुविधा NPS में

2-  दो लाख रूपये तक सालाना tax छूट NPS में निवेश पर

3-  12% से अधिक return NPS में पिछले पांच साल में मिला

4-  40% राशि एन्यूटी में जमा कर 60% निकालने की सुविधा









Thursday, June 28, 2018

अपनी ख़ुशी को समझें



Understand Your Happy

हर बार नये साल पर हम खुद को बदलने की ठानते है। बीता साल जिन बातों के लिए खुद को कोसते हुए गुजरा है, उनसे दूर रहने की सोचते हैं। पर जैसे-जैसे दिन गुजरते है, ना आदतें बदलती हैं और ना हम। इस बार अपनी ख़ुशी को समझें और उसे ही ढूंढें...

संत आमतौर पर अच्छी बातें ही करते है। एक जैन संत है, उनके यहाँ जाने पर वह दो बातें हमेशा कहते है, दया का भाव रखना और खुश रहना। अभी कुछ समय पहले मैंने पूछा, ‘संत समभाव रखने के लिए कहते है, आप खुश रहना क्यों कहते है?’ इस पर वह बोले- हर हालात में खुश रहना आसान नही होता। और जो ऐसा करते है, उनमें समभाव आ ही जाता है।

अनुकूल हालात होने पर हम खुश होते ही हैं। दिक्कत तब होती है, जब हम खुद को वैसा नही पाते, जैसा होना चाहते है। यही वजह है कि जब तब खुद को बदलने की इच्छाएं जोर मारती रहती है। इस बीच कभी हम खुद से नाखुश होते है तो कभी दूसरों से। कितनी ही बार हमारे लक्ष्य केवल खुद को साबित करने की प्रतिक्रिया भर होते है। और यही हम मार खा जाते है। सब ठीक होने के बावजूद खुश नही हो पाते। खुद को बदल नही पाते।

नजर हो ख़ुशी पर

बेहतरी के लिए बदलाव करना ही चाहिए। नये सपनों और इच्छाओं को life में जगह मिलती रहनी चाहिए। और यह नये साल पर भी हो सकता है या फिर किसी भी अन्य दिन। पर यह पूछना भी जरूरी है कि आप क्यों बदलना चाहते है? कनाडा की bestseller writer डेनियल लापोर्ट कहती है, ‘इरादे और लक्ष्य हमारे विस्तार और आजादी का जरिया होते है। लेकिन जैसे ही हम हथौड़ा लेकर लक्ष्यों को पूरा करने के पीछे पड़ जाते है तो कुछ हासिल नही होता। और फिर हम अपने आत्मसम्मान, सम्बन्ध और रचनात्मकता को चोट पहुँचाने लगते है।‘

प्रश्न हो सकता है कि कुछ तय किये बिना कहां कुछ हासिल होता है? बदलाव के लिए बेचैनी होगी ही? पर मनोविज्ञान कहता है कि जब तक लक्ष्य हमारे मूल्यों से नही जुड़ते, तब तक बदलाव नही आ पाता।

‘सेवन हेबिट्स ऑफ़ हाइली इफेक्टिव पीपुल’ के writer स्टीफन कोवे, बदलाव के लिए लक्ष्यों को जीवन मूल्यों से जोड़ने पर जोर देते है। वह कहते है, ‘किसी जगह जाना आपका लक्ष्य हो सकता है, पर घूमना जीवन मूल्य है। घूमने की जगहें यानी लक्ष्य बदलते रहते है, पर value नही।‘

वजन कम करना लक्ष्य हो सकता है, पर अच्छी health आपका जीवन मूल्य है। इसी तरह दया, ईमानदारी, करुणा, उदारता, न्याय, ज्ञान, नेतृत्व, समृद्धि, रचनात्मकता, मेहनत आदि 418 तरह के जीवन मूल्य बताये गये है। खुद को बदलते समय हमें इन्ही मूल्यों को ध्यान में रखना जरूरी होता है। मनोवैज्ञानिक स्टीफन हेज इसे ‘एक्सेपटेंस एंड कमिटमेंट थेरेपी’ के रूप में पेश करते है। उनके अनुसार, ‘अगर आप अपनी ‘core values’ के अनुसार नही जी रहे है तो खुश हो ही नही सकते।‘
यूँ भी ख़ुशी कोई मानसिक स्थिति नही है, यह निरंतर मिलने वाला अनुभव है। हमारे व्यक्तिगत प्रयोग है। अपने life को हर गलती, हर अभाव से समझने की सोच है। 

बातें, जो देंगी ख़ुशी

1-  रोजमर्रा के छोटे-छोटे कामों में negative होना छोड़ें। क्या कहा, क्यों कहा, क्या किया। हर बात पर संदेह करना छोड़े। दिमांग शांत रहेगा, दूसरों पर विश्वास बढेगा।

2-  खुद से पूछें कि क्या आप वाकई ऐसा चाहते है? अगर हां, तो उसे पाने का हर प्रयास करें।

3-  खुद को मनुष्य के तौर पर स्वीकारें। आपको भी खुश रहने का अधिकार है। खुद को गलतियां करने की छूट दें। दूसरों की तारीफ करें।










    
  

  


Tuesday, June 26, 2018

General Science सामान्य विज्ञान


Solar System (सौर मंडल)

1-  सूर्य मुख्य रूप से hydrogen gas से बना है

2-  सौर मंडल में सूर्य और वह खगोलीय पिंड सम्मलित हैं, जो सौर मंडल में एक दूसरे से गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा बंधे है।

3-  पृथ्वी के निकटतम तारा है: प्रॉक्सिमा सेंटॉरी (4.22 प्रकाश वर्ष)

4-  सूर्य अपने केंद्र पर एक चक्कर लगाने में 25 करोड़ साल लग जाते है। इस अवधि को cosmic वर्ष कहा जाता है।

5-  सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुँचाने में लगभग 8.3 minute का समय लगता है।

6-  प्रकाश वर्ष दूरी को मापने की एक इकाई है।

7-  सूर्य या किसी अन्य तारे के चारों ओर परिक्रमा करने वाले खगोल पिंडो को गृह कहते है।

8-  international खगोलीय संघ के अनुसार हमारे सौर मंडल में 8 गृह हैं- बुध,शुक्र,पृथ्वी,मंगल,बृहस्पति,शनि,युरेनस और नेप्चून।

9-  8 ग्रहों के अतिरिक्त तीन बौने ग्रह भी है- सीरीज, प्लूटो और एरीस।

10-बुध सूर्य के सबसे नजदीक ग्रह है।

11-शुक्र पृथ्वी के सबसे नजदीक है।

12-शुक्र गर्म ग्रह है।

13-मंगल ग्रह को “लाल ग्रह” भी कहा जाता है।

14-बृहस्पति सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह है।

15-टाइटन शनि ग्रह का सबसे बड़ा उपग्रह है।

16-चन्द्रमा को अपनी धुरी पर घूमने में 27 दिन, 7 घंटे और 11 minute लगते है।

17-पृथ्वी का निकटतम तारा अल्फ़ा सेंचुरी है।

18-क्षुद्रग्रह वे ग्रहों के टुकड़े है जो मंगल और बृहस्पति की कक्षा के बीच में स्थित है।

पोषण (Nutrition)

1-  पोषण (nutrition) वह विशिष्ट रचनात्मक उपचयी क्रिया जिसके अंतर्गत पादपों में संश्लेषण तथा स्वांगीकरण और विषमपोषी जंतुओं में भोज्य अवयव के अंत:ग्रहण पाचन, अवशोषण स्वांगीकरण द्वारा प्राप्त energy से शारीरिक वृद्धि, मरम्मत, उतकों का नवीनीकरण और जीवन क्रियाओं का संचालन होता है, सामूहिक रूप में पोषण कहलाती है

2-  न्यून पोषण (under-nutrition) अवस्था के अंदर अल्पाहार से पोषण का स्तर उपयुक्त नही रहता।

3-  कुपोषण (malnutrition) की अवस्था में एक या अनेक पोषक तत्व प्रतिदिन भोजन में रहते ही नही। इसलिए body में कुपोषण के चिह्न दिखाई पड़ते है। “न्यून पोषण” वाले व्यक्ति दुर्बल और कम weight वाले होते है एवं यह बच्चों के विकास में एक गम्भीर problem है।

4-  जीवों को उनके energy ग्रहण करने के अनुसार स्वपोषक और परपोषी में बांटा जाता है।

5-  स्वपोषी (autographs) वे सजीव है जो साधारण अकार्बनिक अणुओं से जटिल कार्बनिक यौगिको का निर्माण कर सकते है। इस कार्य के लिए आवश्यक energy के लिए वे प्रकाश या रासायनिक उर्जा का उपयोग करते है। स्वपोषी सजीवों को खाद्य श्रृंखला में उत्पादक कहा जाता है। हरे पेड़-पौधे प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण के द्वारा अपना भोजन स्वंय बनाते है तथा स्वपोषी कहलाते है।

6-  परपोषी (heterotroph) वे जीव है जो स्वंय कार्बन स्थिरीकरण नही कर सकते और वृद्धि के लिए जैविक कार्बन पर निर्भर करते है। परपोषी कार्बनिक यौगिकों को पचाने से पोषण प्राप्त वे जीव है। पशु, कवक भोजन के रूप में उपयोग करने के लिए कार्बनिक यौगिकों संश्लेषण (synthesize) करने में असमर्थ है। पशु मुख्य रूप से परपोषी है।

प्रकाश संश्लेषण(Photosynthesis)

1-  सजीव कोशिकाओं के द्वारा प्रकाशीय energy को रासायनिक energy में परिवर्तित करने की क्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते है।

2-  प्रकाश संश्लेषण वह क्रिया है जिसमें पौधे अपने हरे रंग वाले अंगो जैसे पत्ती, द्वारा सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में वायु से CO2 तथा भूमि से जल लेकर जटिल कार्बनिक खाद्य पदार्थो जैसे कार्बोहाइड्रेट का निर्माण करते है तथा oxygen बाहर निकालते है।

3-   प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में पौधों की हरी पत्तियों की कोशिकाओं के अंदर CO2 और पानी के संयोग से पहले साधारण कार्बोहाइड्रेट और बाद में जटिल कार्बोहाइड्रेट का निर्माण होता है।

4-  इस प्रक्रिया में O2 एवं energy से भरपूर कार्बोहाइड्रेट (सुक्रोज, स्टार्च(मंड) आदि का निर्माण होता है तथा O2 gas बाहर निकलती है। जल, CO2 सूर्य का प्रकाश तथा क्लोरोफिल (हरितलवक) को प्रकाश संश्लेषण का अवयव कहते है। इसमें से जल तथा CO2 को प्रकाश संश्लेषण का कच्चा माल कहा जाता है।

5-  प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया सबसे important जैवरासायनिक अभिक्रियाओं में से एक है। सीधे या परोक्ष रूप से दुनिया के सभी सजीव इस पर आश्रित है। प्रकाश संश्लेषण करने वाले सजीवों को स्वपोषी कहते है।

6-   रासायनिक समीकरण
6CO2+12H20+प्रकाश+क्लोरोफिल= C6H12O6+6O2+6H2O+क्लोरोफिल

कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate)

1-  कार्बोहाइड्रेट, कार्बनिक पदार्थ हैं जिससे कार्बन, hydrogen व् oxygen होते है। कुछ कार्बोहाइड्रेट सजीवों के body के रचनात्मक तत्वों का निर्माण करते है जैसे कि सेल्युलोज, हेमीसेल्युलोज, काइटिन तथा पेक्टिन। जबकि कुछ कार्बोहाइड्रेट energy प्रदान करते है, जैसे कि मंड, शर्करा, glucose, गलाइकोजेन। कार्बोहाइड्रेट test में मीठा होते है।

2-  कार्बोहाइड्रेट body में power उत्पन्न करने का प्रमुख स्रोत है। body को power और गर्मी प्रदान करने के लिए चर्बी की भांति यह कार्य करता है। कार्बोहाइड्रेट fat की अपेक्षा body में जल्दी पच जाते है।

3-  body को कार्बोहाइड्रेट दो प्रकार से प्राप्त होते है, पहला माड़ी अर्थात स्टार्च तथा दूसरा चीनी अर्थात शुगर। गेंहू, ज्वार, मक्का, बाजरा, मोटे अनाज तथा चावल और दाल तथा जड़ो वाली vegetables में पाए जाने वाले कार्बोहाइड्रेट को माड़ी कहा जाता है।

केला, अमरुद, गन्ना, चुकन्दर, खजूर, छूआरा, मुनक्का, अंजीर, शक्कर, शहद, मीठी सब्जिया, सभी मीठी खाद्य से प्राप्त होने वाले कार्बोहाइड्रेट अत्यधिक शक्तिशाली और health के लिए लाभदायक होते है।

4-  कार्बोहाइड्रेट की अधिकता अनेक खतरनाक जानलेवा रोगों को भी जन्म देती है जिसमे प्रमुख रूप से अजीर्ण, मधुमेह, अतिसार रोग होते है। इसमे अत्यधिक weight बढ़ जाने से भी life को खतरा उत्पन्न हो जाता है।

वसा (Fat)

1-  वसा body को active बनाये रखने में सहयोग करती है। वसा body के लिए उपयोगी है, किन्तु इसकी अधिकता हानिकारक भी हो सकते है। यह मांस तथा वनस्पति समूह दोनों प्रकार से प्राप्त होती है। इससे body को दैनिक कार्यो के लिए शक्ति प्राप्त होती है।

2-  वसा को शक्तिदायक ईधन भी कहा जाता है। एक healthy व्यक्ति के लिए 100 gram चिकनाई का प्रयोग करना आवश्यक है। इसको पचाने में body को काफी समय लगता है। यह body में protein की आवश्यकता को कम करने के लिए आवश्यक होती है।

3-  वसा का body में अत्यधिक मात्रा में बढ़ जाना उचित नही होता। यह संतुलित आहार द्वारा आवश्यक मात्रा में ही body को उपलब्ध कराई जानी चाहिए। अधिक मात्रा जानलेवा भी हो सकती है।

4-  खाद्य पदार्थो दो प्रकार की वसा होती है: संतृप्त (Saturated), असंतृप्त (Unsaturated) वसा। संतृप्त वसा नुकसानदेह cholesterol बढ़ाती है, इसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए। मक्खन, शुद्ध घी, वनस्पति घी, नारियल और ताड़ का तेल संतृप्त वसा के प्रमुख स्रोत है। असंतृप्त वसा सीमित मात्रा में ठीक कही जा सकती है। असंतृप्त वसा के प्रमुख स्रोत मूंगफली, सरसों, सूरजमुखी, सोयाबीन तेल है।






   

Monday, June 25, 2018

हार से निराश न होकर खुश पर विश्वास

Happy and not Disappointed trust
Happy and not Disappointed trust


बीते कल में हार मिली है तो जरूरी नही कि आने वाला कल भी निराश ही करेगा। हारना बुरा नही है। यकीन मानिए कि आपकी ईमानदार कोशिश को गले लगाने वालों की कमी नही है।

हारना बुरा नही है। बिलकुल भी नही। ‘भला ऐसा कैसे हो सकता है! हारना हमारी कर्मियों की निशानी है, हार हमें दूसरों की नजरों में गिरा देती है, हार हमारा self-confidence कमजोर कर देती है, जिन्दगी में जो भी बुरा हो रहा है... सब इस एक हार की वजह से ही तो है।‘ जिन्दगी में कई ऐसे मौके आते है, जब हम खुद ये बातें कहते है। ऐसे में फिर यह बात याद दिलाने की जरूरत है कि हारना बुरा नही है।.. और क्या हुआ अगर आप हार गये है? कम से कम आपने कोशिश तो की। ये कोशिश ही आपकी सफलता है।

हार आपकी पहचान नही

हां, किसी असफलता के बाद तुरंत से खुद पर विश्वास करना थोड़ा मुश्किल है। याद रखें, हार आपको परिभाषित नही कर सकती। आपका अतीत इसकी वजह से नही था और आपका भविष्य इस हार पर टिका हुआ नही है। आप एक व्यक्ति है, न कोई हार। आप इस हार से कहीं ज्यादा अहम है। ऐसे में यह खुश होने वाली बात है कि आपने काम को टालने की बजाय उसे करने का option चुना है। अपने इस गुण को पहचानें। आप खुद पर विश्वास करें और अपनी गलतियों से सीखें। इससे आप self-confidence नही खोएंगे।

हार से ही है जीत की पहचान

किसने कहा है कि असफलता बुरी है? हां, हर कोई यही कहता है! हमें गलत के बारे में पहले सिखाया जाता है, उसके बाद सही चीजों के बारे में बताया जाता है। उसी तरह हमें पहले हारने के बारे में बताया जाता है, उसके बाद जीतने के बारे में बताया जाता है। जीत को रोशनी से जोड़ा जाता है और हार को अँधेरे से। पर ऐसा क्यों होता है? हमें यह समझने की जरूरत है कि हार कर ही असल जीत हासिल होती है। दोनों, एक-दूसरे के बगैर अधूरे है। अँधेरे रास्तों पर चले बिना हमें रोशनी की अहमियत नही महसूस होगी। यह बहुत जरूरी है कि जीत और हार, दोनों को एक ही तरह से लिया जाएँ।

हारना क्यों अच्छा है

सफलता की शुरुआत हार से होती है। यह जरुर है कि सफलता के लिए दूसरी चीजें भी मायने रखती है, जैसे सही समय, अवसर और अनुकूल परिस्थितियां। इसलिए असफलता बुरी नही है। हर success व्यक्ति जानता है कि हारना अच्छा है। पर कौन सी बातें है जो हारने को अच्छा बनाती है, यह समझना भी जरूरी है कि

Ø   खाली बैठने और दूसरों से ईष्यॉ करने की बजाय आपने उस काम को किया

Ø  आपने साबित किया कि आपमें कई गुण है, जैसे साहस, दृढ निश्चय, धैर्य, इच्छाशक्ति, शुरुआत करने का साहस।

Ø  आपने खुद को संवेदनशील बनाया है, जो बाद में आपको ताकतवर बनाएगी।

Ø  किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले आप हारे नही। अपने अंत तक टिके रहे।

Ø  आपने हार की परवाह किये बगैर किसी काम को करने की पहल की। यह बहुत बड़ी बात है।

व्यर्थ की बातों को हार से मत जोड़िये

अपनी छोटी-बड़ी हर बात को हार से ना जोड़े। थका हुआ, हताश, दुखी, ठगा हुआ, दुविधा, आभार और कड़वाहट महसूस करना जैसी बेकार की बातों को अपनी इस हार से जोड़ना ठीक नही है। यह उस हार की गलती नही है कि आपने अपनी हताशाओं को उससे जोड़ दिया है। आप नियंत्रण न खोयें। आप इसलिए हार न मानें क्योंकि इस समय परिस्थितियाँ आपके पक्ष में नही है। आप अपने सपने पर यकीन रखें, बिना किसी वजह के, पागलपन की हद तक। फिर आपको उसे पूरा करने के लिए जो भी करना हो, आप करें। अगर आप वाकई अपनी गलतियों से सीख रहे है, निरंतर अपना विकास कर रहे है, हार के बाद भी अपने सपने को जोश के साथ पूरा करने में लगे है, जिसमें कोई कड़वाहट नही, कोई दुर्भावना नही है, तो एक दिन आप जरुर success होंगे। ध्यान रहे, हार और जीत दोनों जरूरी है दुनिया बदलने के लिए।

हार सफलता की गारंटी नही

आपको असफलता हाथ लगी है, इसका मतलब ये भी नही है कि आपका जीतना निश्चित हो गया। प्रतिबद्दता, लगन, जिद और निरंतर कोशिश के बिना सफलता की कोई गारंटी नही है। असफलता आपसे कोई वादा नही करती कि आप अगली बार success होगे ही। हार जीत की तरफ ले जाती है और जब-जब आप हारते है यह निश्चित है कि आप जीत के करीब आते है। आपकी जीत की वक्त इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कितने जतन किये और गलती को दोहराए बिना आगे बढ़ते गये। जीत का स्वाद चखने से पहले हममें से कई लोगो को हारना पड़ता है। कुछ लोग जल्दी जीत को पा लेते है और बाकी लोग यह सोचते रह जाते है कि वे क्यों नही जीत पाए। अपनी तुलना बंद कीजिये। एक बात याद रखें कि क्या आप खुश होना चाहते है और जीत का आनन्द लेना चाहते है? अगर हां तो अपने रास्ते बनाएं, अपनी हार से सीखें, बुद्धिमानी से काम लें और मेहनत करें। और हां, सबसे जरूरी है खुद पर विश्वास करना।





# इस article के writer ‘फरनूश ब्राक’ जो ईरानी लेखिका है। जो business और career coach. प्रोलिफिक लिविंग की संस्थापिका। सफलता और विकास उनके प्रिय विषय है।