Thursday, January 25, 2018

अपनी Problem का आप हैं समाधान

professional problem


problems हमारी जागरूकता की कमी का नतीजा होती है और समाधान आंतरिक रूप से जागरूक होने के बाद मिलते है। life के हर आयाम को बेहतर बनाने के लिए भीतर से सजग होना बेहद जरूरी है।

पिछले कई सालों से मैं दुनियाभर के लोगो के सवालों और पशोपेश को हल करने की कोशिश कर रहा हूँ। ये सवाल अलग-अलग देश के लोगो के हैपर पैदा एक ही जगह से हो रहा हैं। मन के भीतर पैदा हुए असमंजस और अँधेरे के कारण ही ये सवाल पैदा होते है। मैंने यह महसूस किया है कि भले ही लोगो की परेशानियाँ अलग-अलग होपर इनका कारण एक ही है। लोग दुखी है,दर्द में है तो इसलिएक्योंकि वो पूरी तरह से सजग नही है। वे संकुचित मानसिकता के जाल में फंसे हुए है। इस मनोस्थिति में एक कदम भी आगे बढ़ाना उनके लिए किसी लड़ाई से कम नही है। life में परेशानी पैदा ही इसलिए होती हैक्योंकि हम वो करते है जो हमारे लिए प्रभावी साबित नही हो सकते। इस नाकामी से निराशा बढ़ती जाती है और energy कम होती जाती है।

famous scientist अल्बर्ट आइन्स्टाइन ने कहा भी है, ‘किसी भी problem का हल सजगता के उस स्तर पर नही मिल सकता हैजिस स्तर पर वह परेशानी पैदा हुई है।यानी life के उलझे सवालों के जवाब खुद को पहले से ज्यादा सजग बनाकर ही पाए जा सकते है। जब सजगता बढ़ती है तो डर खत्म हो जाता हैमन में नये विचार आते है और life में आगे बढ़ने के लिए जगह मिलती है। अपने अंहकार को अपनी life की कमान सौपने की जगह हम अपने असली स्वरूप को जिन्दगी की चाबी दे देते है। हमारी आंतरिक शांति,शुद्दता और ज्ञान हमारी जिन्दगी को दिशा देने लगते है। इस विकास क्रम में हम जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैसम्पूर्ण सजगता हमारी पहुंच में आने लगती है। इस स्थिति में कोई problem हमारे लिए मायने नही रखती। संभावनाओ के अनंत द्वार खुल जाते है। संघर्ष खत्म हो जाते हैइच्छाएं अपने आप पूरी हो जाती हैं। हमें ऐसा महसूस होता है कि जागरूकता के इस स्तर तक पहुंचने में लम्बा समय लग जायेगा,जबकि सच्चाई यह है कि सम्पूर्ण सजगता हर पल हमें सही दिशा दिखाने कि कोशिश करती हैबशर्ते आप उस सन्देश को समझ सकें।

जागरूकता के तीन पड़ाव

आंतरिक सजगता के तीन पड़ावों को समझकर खुद की खोज की आपकी राह थोड़ी आसान हो जाएगी। मान लीजिये आप एक अंधेरे कमरे में चल रहे है और रोशनी के लिए आपके पास एक मोमबत्ती भर है। आप कमरे में रखे सामानों से टकरायेगें। खुद को अलग-थलग महसूस करेंगे। इसे संकुचित सजगता कहते हैं। अब imagine कीजिये कि आपके हाथ में किसी ने flash light थमा दी हैं। अब आपको कोई डर नही है। अब जक जो बाधाएं नजर आ रही थीउनका purpose भी समझ पा रहे हैं। सोफा नजर आ रहा हैजिस पर आप बैठ सकते है। books नजर आ रही हैजिन्हें आप पढ़ सकते हैं। music system नजर आ रहा हैजिससे आप गाने सुन सकते है। यानी कुछ समय पहले तक जो चीजें आपके लिए बाधा थीवही अब मौके में तब्दील हो गई है। आप एक चीज को दूसरी चीज से आसानी से जोड़ पायेंगे। इसे विस्तृत सजगता कहते है।

अब imagine कीजिये कि इस बार वह room, उसकी दीवारें, floor और यहाँ तक कि छत भी शीशे की बनी हुई है। पूरा कमरा सूरज की रोशनी से भरा हुआ है। अब आप बाहर देखेंगे तो महसूस करेंगे कि आपके पास अवसरों की कोई कमी नही है। पूरी दुनिया आपका मच है। यही आपका पूरी तरह से सजग होना है। अब आपके सामने कोई problem नही हैइसलिए उसके हल तलाशने की जरूरत भी नही है। अब आपको जिन्दगी में एक प्रवाह नजर आएगा और उसे आप अपने इशारों पर नचा पायेंगे।

अपनी Power को पहचानें

1-  अपने मन के कोने में छुपी अवधारणाओं और सोच पर नजर डालें।
2-  अपनी भावनाओं की जिम्मेदारी लें। दूसरों को दोष देना या दिखावा करना बंद करें।
3-  अपने option सीमित न रखें। प्रश्नों का हल कही से भी प्राप्त हो सकता है।
4-  विश्वास रखें कि problem का हल जरुर मिलेगाभले ही उसमें थोड़ा वक्त लग जाएँ।
5-  जिज्ञासु बनें। मन के बातें सुने। मन जो कहेंउस और कदम बढायें।
6-  अनजान राह पर चलने में परहेज न करें। आपके सवालों के जवाब वही कही मिलेगें।
7-  इस बात को accept करें कि हर कोईहर पल अपनी दुनिया में अलग-अलग तरह की चुनौतियों का सामना करता है।
8-  हर दिन का सामना एक नये दिन के रूप में करें।

जब आप इन तरीकों को अपनायेगे,अपनी पारंपरिक सोच और व्यवहार का साथ छोड़ेंगे तो सवालों के नये जवाब पाने की संभावना बढ़ जाएगी। आप यह समझ पायेंगे कि आपके अपने संघर्ष और कुंठा ने ही आपके विकास की गति को धीमा कर रखा था। आपको आत्मिक शांति मिलेगी और जिन्दगी में आगे बढ़ना आपके लिए आसान हो जायेगा।

इस article के writer Deepak chopra हैजो international ख्याति भारतीय मूल के अमेरिकी writer, modern motivational गुरु व् physician हैं। वह 75 से अधिक books लिख चुके हैं।


                                      www.deepakchopra.com



                                                      बोलने में बरतें संयम



                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                


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