Monday, November 9, 2020

हल्का गर्म Water पीने और Massage के habits से आराम

हल्का गर्म water
     


गर्म Water पीना

हमारे body के प्रत्येक तंत्र की कार्यप्रणाली water पर depend होती है। यूँ सादा या गर्म, water दोनों रूपों में पीना अच्छा रहता है। पर इस समय हल्का गर्म water पीना बढ़िया है। आर्युवेद के अनुसार, सादे पानी को body में अवशोषित होने में 6 घंटे लगते है, पर गर्म पानी को इससे आधा समय लगता है। पानी को 10 minute तक उबालकर फिर पियें तो पाचनतंत्र बेहतर काम करता है।

सही तरीका: water को बहुत गर्म न पीये, गुनगुना पानी पियें। हल्का गर्म पानी दिन में तीन बार जरुर लें। Morning खाली पेट, दोपहर को खाना खाने से पहले और रात में सोने से पहले। Annuls of international medicine में 2011 में प्रकाशित एक study के अनुसार, खाना खाने के आधा घंटा पहले एक गिलास हल्का गर्म water पीने से metabolism की दर 20% बढ़ जाती है। पानी का तापमान 98.6 डिग्री फॉरेनहाइट तक बढ़ा दें तो यह 30% तक बढ़ जाती है। दिन की शुरुआत में हल्के गर्म पानी में नीबू का रस और शहद मिलाकर पियें। यह body की fat को तोड़ने में मदद करता है। दोपहर और रात में सादा कुनकुना पानी पियें।

क्या है लाभ: गाज़ियाबाद स्थित फ्लोरेंस हॉस्पिटल के सीनियर फिजीशियन, एम.डी, डॉ. एम.के.सिंह कहते है, गर्म पानी पीने के कई कई फायदे है:

1-  गर्म पानी पीने से पाचन क्रिया तेज होती है। पोषक तत्व बेहतर मिल पाते है।

2-  खून संचार बेहतर होता है। रक्तदाब control रहता है। heart रोगों का खतरा कम होता है।

3-  गर्म पानी पीने से केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली बेहतर बनती है। Body का तापमान काबू रहता है। weight कम करने में भी आसानी होती है।

4-  गर्म पानी वैसोडिलेटर की तरह काम करता है, यह रक्त नलिकाओं को फैलाकर blood का संचार बेहतर बनाता है। इससे मांसपेशियों relax होती है और pain कम होता है।

5-  गर्म पानी पीना body से toxin को निकालने में महत्वपूर्ण है। इससे body में swelling कम करने में सहायता मिलती है, जोड़ों को चिकनाई मिलती है और गठिया से बचाव होता है

6-  सोने से पहले कुनकुना पानी पीने से दिन भर की थकान दूर होती है। नींद बेहतर आती है।

ध्यान रखें: नार्वे की ओसली university में हुए study के अनुसार, अधिक मात्रा में गर्म पानी लेने से toxin को body से बाहर करने का kidney का काम बढ़ जाता है। Blood के electrolyte भी कमजोर पड़ जाते है। इसका अधिक सेवन blood का volume बढ़ाता है, जिससे blood presure बढ़ सकता है। ज्यादा गर्म पानी पीने से पसीना ज्यादा आता है, जिससे बैचेनी व् चक्कर आने की problem हो सकती है।

Water की भाप लेना

डॉ. सिंह कहते है, ‘ नाक की नली को खोलने के लिए यह असरदार है। इससे सर्दी या सायनस के लक्षणों में आराम मिलता है। भाप लेते समय पानी की भाप को अंदर लिया जाता है। यह गर्म और नम वायु नाक की नली, गले और फेफड़ो के म्युकस को मुलायम कर देती है, जिससे नाक की नली की सूजी हुई रक्त नलिकाओं को आराम पहुंचता है। सावधानी से भाप ली जाए तो इसका कोई नुकसान नही है।

सही तरीका: Water को उबलने तक गर्म करें। एक बड़े कटोरे में डालें। अपने सिर के पिछले भाग को तौलिये से ढक लें। आँखों को बंद करें और सिर को थोड़ा सा हुए भाप लें। 8 से 12 इंच की दूरी बनाये रखें। गहरी सांस लेते हुए भाप को अंदर ले जाएँ। एक बार में 10 minute तक भाप लें। भाप कई बार ले सकते है, जिसे वैपोराइजर कहते है।

क्या है लाभ: भाप लेना म्युकस को मुलायम और पतला करता है, जिससे उसे बाहर निकालने में आसानी होती है। इन लक्षणों में आराम मिलता है: सामान्य जुकाम, फ्लू(इंफ्लूएंजा), साइनस का infection, ब्रोंकाइटिस, नाक की नली और गले की खराश।

इन्हें भी आजमायें: भाप के पानी में कुछ जड़ी-बूटी या एसेंशियल आयल भी मिला सकते है। अजवाइन के फूल. पुदीना,तुलसी,यूकेलिप्टस यानी नीलगिरी का तेल भाप लेने के पानी में मिला सकते है। तुलसी में antiseptic और antibacterial गुण होते है। पुदीने और यूकेलिप्टस की गंध बहुत तेज होती है, इन्हें कम मात्रा में ही मिलाएं। इससे साइनस में आराम मिलता है व् फेफड़ों से pollution का असर कम होता है।

काढ़ा पीना

महर्षि आयुर्वेद के अध्यक्ष श्री आनंद श्रीवास्तव कहते है, ‘काढ़ा आर्युवेदिक पेय है, जिसका अकसर सर्दी, खांसी, जुकाम, गले की खराश या मौसमी बुखार में सेवन किया जाता है। इसे भारतीय मसालों और जड़ी-बूटियों से तैयार किया जाता है।

कैसे करें तैयार: यह कई तरीके से तैयार किया जाता है। प्रचलित प्रद्धति यह है; दो कप water, एक इंच अदरक का छिला हुआ टुकड़ा, 4-5 लौंग, 5-6 ताज़ी तुलसी की पत्तियां, 2 इंच का दालचीनी का टुकड़ा व् आधा चम्मच शहद।

एक बर्तन में water उबालने के लिए रख दें। उपर की सामग्री को कूटकर इसमें डाल दें। अब तुलसी की पत्तियाँ डाल दें। इसे मध्यम आंच पर बीस minute तक पकाएं। पानी आधा रह जाएँ, तब इसे गिलास में छान लें व् इसमें शहद मिला दें। काढ़े को गुनगुना ही पियें। इसमें मुलैठी व् गिलोय भी मिला सकते है।

क्या है लाभ

1-  यह immunity को मजबूत बनाकर infection से लड़ने में सहायता करता है। इसमें anti-oxidant भरपूर होते है। anti-oxidant हमें बीमारियों की चपेट में आने से बचाते है।

2-  इसमें anti-viral गुण होते है, जो सर्दी-खांसी में आराम देते है। म्युकस का जमाव कम होता है।

ध्यान रखें: इसमें मसाले और जड़ी- बूटियाँ होती है, जिससे body में अत्यधिक ऊष्मा पैदा होती है। अधिक मात्रा में इसके सेवन से लीवर से जुडी problem होने लगती है। साथ ही छाती में जलन, जी मिचलाना, पेशाब में जलन, मुंह में छाले हो सकते है। Acidity रहती है तो विशेषज्ञों की सलाह ले लें। काढ़े का सेवन सुरक्षित है, पर अति वर्जित है।

Massage

Massage से तन और मन दोनों के tension दूर होते है। body को ताजगी देने का अति प्राचीन तरीका है। छोटे-बड़ो से लेकर गर्भवती महिलाओं के लिए भी मालिश अच्छी मानी जाती है। इससे मांसपेशियों की अकड़न दूर होती है और body को आराम मिलता है।

सही तरीका: तेल को उस भाग पर लगायें, जिसकी massage करनी है। फिर धीरे-धीरे मालिश करें, जब तक कि तेल पूरा सूख न जाए। इसके बाद हथेलियों और उँगलियों के द्वारा उपर की ओर stroke लगायें, न बहुत तेज, न बहुत धीमे। pressure केवल मांसपेशियों पर लगाना चाहिए, bones पर नही। अमेरिकन मसाज थेरेपी असोसिएशन के अनुसार, गठिया या bones की problem है तो उनके pressure point तेजी से न दबाएँ, fracture या pain बढ़ सकता है।

क्या है लाभ: डॉ. महाजन कहते है, नियमित मालिश से blood circulation बढ़ता है। body से toxin निकलते है। मांसपेशियां मजबूत व् लचीली बनी रहती है। मसाज के लिए अलसी, नारियल, तिल, सरसों व् जैतून का तेल skin के सौन्दर्य, जोड़ों के दर्द, अकड़न व् swelling में आराम देते है। 50 की उम्र के बाद मालिश जरुर करनी चाहिए।

                                                                      

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